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इस छाँव में भी तो दिल के पुष्प खिलें

                
                                                         
                            ग़म के आँचल के दो कोने
                                                                 
                            
इक तेरे लिए इक मेरे लिए
आ कि इस आँचल को पकड़
चल हम तुम दोनों साथ जियें
ग़म के आँचल...।
कहीं तो थोड़ी छाँव मिले
ज़रा अपनेपन का भाव मिले
ना ख़ुशी तो ग़म की छाँव सही
इस छाँव में भी तो दिल के पुष्प खिलें
वो छाँव सुकून वाला होगा
कभी जग का मन ना काला होगा
ना होंगे झूठी उम्मीदों के दीये
बस ग़म की मखमली धूप ही अपने लिए
आ मुस्कुरा कर इस जीवन का
लें तुम और मैं आनंद प्रिये
ग़म के आँचल...।
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एक महीने पहले

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