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दूर से दिखते जो मंजर सुहाने लगते हैं

                
                                                         
                            दूर से दिखते जो मंजर सुहाने लगते हैं
                                                                 
                            
पास आते ही वही डराने लगते हैं
हे मोहब्बत तो रहेगी कायम हरदम
याद आता वही जिसे भुलाने लगते हैं
दिल में जज्बात चाहत ही न हो कोई
जो भी अपने हों वही बेगाने लगते हैं
क्या गुजरती है किसी पर कोई जाने कैसे
नज़र के सामने आये मुस्कुराने लगते हैं
जीते जी रहते हैं अपनी कदर से महरूम
बाद जाने पर खूबियां गिनाने लगते हैं
ग़म ए ज़ीस्त से बचकर जिया कौन " वफ़ा"
दूर जाने से बेहद क़रीब आने लगते हैं
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एक घंटा पहले

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