बस यही सबकी कहानी हो गयी है
यह मोहब्बत जो बेगानी हो गयी है
एक यही ताज़ी ख़बर है रोज़ की
बात का चर्चा जो सदियों पुरानी हो गयी है
रहता जो मौजूद उसी को ढूंढने निकले
हर एक मंजिल लगती बेनिशानी हो गयी है
ख्वाब में देती दिखाई एक हकीक़त तो बने
जिंदगी सबकी अब जिंदगानी हो गयी है
फासले दरमियाँ कुछ भी कम हो सके
दिलों में जो बेवजह बदगुमानी हो गयी है
भरते गये वफ़ा के रंग जब से "वफ़ा"
जिंदगी यह खूबसूरत सुहानी हो गयी है
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