बहुत देर तक ग़मों के साये नहीं होते
जो याद आते न हों वो पराये नहीं होते
खुशियों पर सभी का हक रहता है
दर्द जो याद रहें कभी भुलाये नहीं होते
आना जाना कभी अपने मुताबिक नहीं होता
फिर कहते क्यों? इस दुनिया में आये नहीं होते
खुशियों की अंजुमन योंही बेअसर लगतीं है
दुख भरे दिन जब तलक बिताये नहीं होते
हक़ पाने में वही वही रहते हैं महरूम "वफ़ा"
फ़र्ज़ ज़िन्दगी के जिन्होंने निभाये नहीं होते
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