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ऐसे ख़ाली हाथ

                
                                                         
                            ऐसे ख़ाली हाथ ज़िंदगी
                                                                 
                            
कब तलक चल पाएगी
बिन तुम्हारे साथ ज़िंदगी
कब तलक चल पाएगी
ऊँचे नीचे रास्तों में
टूटेंगी जब हिम्मतें
काम आएंगी ना जब वहां
बैठे ख़ुदा से मिन्नतें
उन लम्हों में हर वक़्त बस
तेरी कमी खल जाएगी
ऐसे ख़ाली हाथ...।
ऐसा नहीं कि हूं चल रहा
किसी सहारे की आस ले
हैं अकेले ही तय किए
अब तलक हर फ़ासले
फिर भी न जाने उम्मीद क्यूं
तेरे संग मेरी मुश्किलें घट जाएगी
ऐसे ख़ाली हाथ...।
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2 महीने पहले

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