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आ सको कभी तो

                
                                                         
                            आ सको कभी तो आ जाओ
                                                                 
                            
कभी ख़्वाबों कभी ख़यालों में
मिल सको तो आ कर मिल जाओ
कभी जवाबों कभी सवालों में
हर जगह राह तेरी देखूँ
हर घड़ी चाह तेरी रखूँ
दिख सको तो हर पल दिख जाओ
मेरे घर की दर-ओ-दीवारों में
बस जाओ यहीं हवाओं में
रच जाओ मेरी दुआओं में
ढूंढूं तुमको मैं कहां कहां
हूं घिरा कई भूचालों में
आ सको कभी तो...।
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2 महीने पहले

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