वसीयत
(एक निजी स्मृति-संग्रह)
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गर्मियाँ
पिता की स्मृतियों में
सिसकती हैं।
बारिश
माँ की याद बनकर
उतरती है।
धुंध
मेरी बहनें हैं।
भोर
मेरे बच्चे हैं।
दोपहर
मेरे शत्रु हैं।
साँझ
मेरे मित्र हैं,
जन्म-जन्मांतर के
सहयात्री।
चाँदनी
मेरी प्रेयसी है,
करुण नयनों वाली।
और मुझमें
शेष बची हुई
अंतिम विरासत है:
यह रात,
जो मेरी परछाईं के साथ
भर्रा उठती है।
यह रात,
जो अपने दहकते ताप में
मुझे डुबोकर
समाप्त हो जाती है।
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