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पीड़ा का शिलालेख

                
                                                         
                            क्षण-क्षण
                                                                 
                            
दुख देकर,
और मिले हुए दुखों से
भीतर ही भीतर
कराहते, विलाप करते हुए
परिपक्व होता यह संसार

काल की शिला पर
बस एक ही पाठ
उकेरता जाता है:

मनुष्य-जीवन की पीड़ा का
एकमात्र उपचार
पीड़ा ही है।
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2 महीने पहले

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