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पर्यावरणप्रेमी की मानवीयता का विस्फोट

                
                                                         
                            एक पर्यावरणप्रेमी की
                                                                 
                            
मानवीयता के फट पड़ने का
यह कार्य-मुहूर्तचित्र है:

बाढ़ के विरोध में
मैंने एक नदी को पकड़कर
जमकर पीट दिया।

हालाँकि वह
क्षणभर में मेरी पकड़ छुड़ाकर
दौड़ती हुई निकल गई।

मुझे लेकर
इतना ही तो कर सकती थी नदी!

न जाने,
मेरी मार से पिटी नदी को
दर्द हुआ भी या नहीं?!
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एक महीने पहले

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