सनस्क्रीन क्रीम कितनी भी मलो,
वर्षा की ओस में कितना भी नहलाओ,
क्या काल कभी
झीलों और सागरों को
लवण की मलिनता से मुक्त कर पाया है?
करस्कर के वृक्ष को
वसंत से क्या,
और ग्रीष्म से क्या!
ऋतुएँ बदलती रहती हैं,
मौसम अपना रूप बदलते रहते हैं,
पर स्वभाव की कड़वाहट
क्या कभी बदलती है?
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