मेरा स्वप्न है, एक ऐसा संसार जहाँ आकाश में एक भी झंडा न लहराए।
किन्तु मैं भलीभाँति जानता हूँ कि यह स्वप्न कभी साकार नहीं होगा। इसीलिए शीघ्र ही जीवन की आँखें मूँद लेना ही मेरा एकमात्र लक्ष्य, मेरा अंतिम आदर्श है।
न भविष्य है, न वर्तमान, इस दुनिया में असंख्य कोणों और खेमों के झंडे विजय-लालसा में फहराते रहते हैं।
मेरे सिर के ऊपर अब बस एक धूसर, फटा हुआ आकाश ही शेष है... और वही अवशेष भी।
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