आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

बॉडीबिल्डिंग : देह का तमाशा

                
                                                         
                            मेंढक-सी देह फुलाकर,
                                                                 
                            
मांसपेशियों के गुब्बारे चढ़ाकर,
आईने के सामने अकड़ना,
हर उभरी नस को
वीरता का तमगा समझना,
और इस देह-प्रदर्शन को
‘बॉडीबिल्डिंग’ नाम देकर
सभ्यता की गर्दन पर टाँग देना,
बस यही है
उस अधम व्यायाम का
महानतम पुरस्कार!
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर