मेंढक-सी देह फुलाकर,
मांसपेशियों के गुब्बारे चढ़ाकर,
आईने के सामने अकड़ना,
हर उभरी नस को
वीरता का तमगा समझना,
और इस देह-प्रदर्शन को
‘बॉडीबिल्डिंग’ नाम देकर
सभ्यता की गर्दन पर टाँग देना,
बस यही है
उस अधम व्यायाम का
महानतम पुरस्कार!
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