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यज्ञ व हवन

                
                                                         
                            यज्ञ,वेदवर्णित,धार्मिक अनुष्ठान
                                                                 
                            
किया जाता,  मनोकामना मान
वेदमंत्रयुक्त 'स्वाहा', ईश्वरस्तुति
हवन सामाग्री,दी जाती देवाहूति।

दिशानिर्धारित देवो का आह्वान
विशिष्ट देव    पाते यज्ञ सम्मान
ऋत्विक,दक्षिणा,का अनुपालन
अग्निहोत्री विधा, मंत्र संचालन।

औषधीय वानस्पति घी संयुक्त
हवन सामाग्री      होता प्रयुक्त
विशिष्ट लकड़ियां बनती संविधा
अग्नि आहुति की वैदिक विधा।।

अहंकार, बुराई की दे आहूति
अग्नि से होती उर्जा की पूर्ति
मानव जीवन    भी  एक यज्ञ
श्वांस आहुति    होती हर पल ।।

यज्ञ वेदी से निकलता धूम
वातावरण जब  लेता   चूम
विषाणु मुक्त  होकर हवायें
रोग दुख को     दुर भगायें ।।

यज्ञ हवन मे   होता है अंतर
पढ़े जाते नही एक सा मंतर
यज्ञ मे हवन रहता सम्मिलित
संत निर्देशित लिए लोकहित ।

हवन ,यज्ञ का छोटा स्वरूप
लोकहित नही व्यैक्तिक रूप
अग्निदेव को दी जाती  हवि
बने रहे सरंक्षक   और अवि।।

संत दिग्दर्शन नही आवश्यक
स्वयं हवन कर सकता याचक
यह कर्मकांड, शुद्धिकरण का
धनात्मक उर्जा   के वरण का ।।

 
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एक महीने पहले

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