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विकास का होता रहे प्रस्फुटन

                
                                                         
                                सावन मास,   तिथि अमावस
                                                                 
                            
   चहुंदिश हरियाली आया पावस।
    प्रकृति,पितर शिव को अर्पित
    संग सूर्यग्रहण,    माया गर्भित।।

    चांद होगा ,सूर्य-आच्छादित
    ग्रहण प्रभाव,   से  मर्यादित।
    अप्रभावित रहेगा भारत देश
     खगोलीय घटनाएं सूदूर देश।।
     
    सावनी अमावस्या का अभियान
     प्रकृति पहने, हरियाली परिधान।
     प्रदूषण मुक्त रहें     पृथ्वी  जल
     हरियाली  अमावस्या की पहल।।
      
सेतुओं से  कर   जलबंधन
नहरों ,  पंपों,    से    स्पंदन।
धाराओं को दे बांधों से मोड
नदी स्वच्छंदता दी गई तोड़।।

ज़हर उगलते जल निकाय
जनसंख्या से हो निस्सहाय ।
वायुमंडल हुआ  धुम्र काय
  पृथ्वी कूड़े की  अतिकाय।।

पर्यावरण सचेतता में हो वृद्धि
बनी रहे ,    स्वास्थ्य  समृद्धि।
  प्रकृति संरक्षक  देवाधिदेव
विनाश विकास के जानते भेव।।

विकास का होता रहे प्रस्फुटन
रहे अप्रभावित प्रकृति संतुलन।
  पूजक हो किसी  आकृति की
  सेवा करो अनवरत प्रकृति की।।
-बिजय बहादुर तिवारी उर्फ
 
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2 महीने पहले

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