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अजब हाल है मेरा

                
                                                         
                            अजब हाल है मेरा, ग़ज़ब सवाल है तेरा,
                                                                 
                            
बाँध के एक दिन आऊँगा मैं सेहरा।
दिन-रात निहारता रहूँगा तेरा चेहरा,
अब नहीं बनूँगा मैं किसी का मोहरा।

दिल के किसी कोने में,
वायलिन के तारों-सी बजती है,
जब देखूँ मैं उसको,
वो परी की तरह सजती है।

धड़कन मेरा दीदार माँगती है,
हर पल बस तेरा ही ख़याल रखती है।
क्या बताऊँ हाल-ए-बयाँ तुझे,
तुझे देखकर ये दिल भी तड़प उठती है।

खुद को खोकर फिर उठता हूँ,
बस तेरा ही सपना देखता हूँ।
नज़रें ढूँढ़ती हैं बार-बार तुझे,
कैसे कहूँ, चैन कहाँ है मुझे!

तेरी चाहत में खोया रहता हूँ,
तेरे ख़यालों में ही जीता हूँ।
दिल की बात लबों तक आती नहीं,
कैसे कहूँ, तेरे बिना रहा जाता नहीं।
-भुनेश्वर अनंत 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

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