तेरी आंखों की गुस्ताखी को, मैंने बड़ी फुर्सत से पढ़ा था,
तेरी आंखों की गुस्ताखी को, मैंने बड़़ी फुर्सत से पढ़ा था,
तेरे इश्क का ये गहरा रंग, ऐसे थोड़े ही हम पे चढ़ा था।
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