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तू ही था

                
                                                         
                            किसी ओर को क्यों कहूं
                                                                 
                            
क्यूंकि वो तू ही था
मेरी जागो में, मेरे ख्वाबों में,
उन तन्हा रातों में,
तू ही था
तू था तो सब अच्छा था
तू नहीं ,फिर भी अच्छा है
क्यों है पता नहीं?
पर तेरा होना, ना होने से ज्यादा अच्छा था
क्योंकि वो तू ही था
दुनिया कब समझेगी
पता नहीं,
समझेगी भी?
पता नहीं
तू आयेगा भी
पता नहीं
पर एक बार आना जरूर
ख्वाबों में ही सही
पर मिलना जरूर
जी नहीं सकती तेरे साथ
पर जीना भी तो तेरे लिए ही है
क्योंकि वो तू ही था
क्योंकि वो सिर्फ तू ही था
जिसके लिए और जिसके साथ जीना था.......
...रूही की कलम से....
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3 महीने पहले

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