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बहुत अकेला हु मैं

                
                                                         
                            बहुत अकेला हूं मैं,
                                                                 
                            
और दुनिया बहुत बड़ी है
फिर भी बहुत अकेला हूं मैं
बातें बहुत है ,
पर कहूं किससे ?
कौन सुनेगा ?
कोई भी तो नहीं
क्यूंकि दुनिया बहुत बड़ी है ,
और मैं बहुत अकेला हूं
इतना अकेला तो शायद सागर भी नहीं
वो भी तो नदियों से मिलता है ना....
पर मैं किससे मिलूं ?
क्यूंकि ना मेरे पास सागर जितने आंसू हैं
और ना ही पानी
क्यूंकि दुनिया बहुत बड़ी है और मैं बहुत अकेला हूं
इतनी अकेली तो शायद हवा भी नहीं ,
वो भी तो खुशबू में घुलती है ना....
पर मैं किसमें घुलु ?
क्यूंकि ना मेरे पास हवा जितना वेग है
और ना ही महक
क्यूंकि दुनिया बहुत बड़ी है और मैं बहुत अकेला हूं
-भावना नज़्म रूही
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3 महीने पहले

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