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इतने तो तुम पत्थर दिल नहीं

                
                                                         
                            मैं ही पागल थी
                                                                 
                            
जो मोहब्बत कर बैठी
पता है, तुम किसी और के हो
फिर भी इंतजार कर बैठी
ऐसी भी क्या मजबूरी रही होगी?
कि तुम दूर हुए
जो तेरे पीछे खुद को बर्बाद कर बैठी
फर्क तो पड़ता होगा ही तुम्हे,
या नहीं पड़ता
इतने तो तुम पत्थर दिल नहीं
याद तो आती ही होगी ना....
याद तो करते होओ गे ना..
भूला तो नहीं सकते
फिर भी भूल गए होओ गे न..
वो मैं ही थी जो खुद को गुमनाम कर बैठी
तुम्हे तो दुनिया जानती ही होगी ना....
-भावना नज़्म रूही..
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2 महीने पहले

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