अंजाम तमाम से ग़ाफ़िल हो गया मैं
तो सारे गुनाहों में शामिल हो गया मै
पानी के बहने से मतलब है मगर
दरिया से कटकर साहिल हो गया मैं
मेरे दिल ने इश्क छुपा भी नहीं पाया
सो दोस्ती का भी कातिल हो गया मैं
कल इक आशिक ये रब से कह रहा था
बनकर आशिक तो जाहिल हो गया मैं
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