खुदके तलाश को घर से निकलना पड़ता है
मकाम पाना हो तो दूर तक चलना पड़ता है
इश्क में ऐसा नहीं कि दोनों साथ साथ चले
चांद रोशन हो तो सुराज को ढलना पड़ता है
हिज़्र एक पड़ाव है इश्क के मुसाफिरों का
हर आशिक़ को एक दिन बिछड़ना पड़ता है
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