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रील के गुरु, मोबाइल के शिष्य

                
                                                         
                            पापा बोले मास्टर जी
                                                                 
                            
बिगड़ गया है यह बच्चा।
लेकर मोबाइल दिन और रात
खेलता है मेरा बेटा।

मम्मी बोली समझाओ,
इसको फ़ोन से दूर करो।
मानता नहीं हमारी बात
आप ही इसको ठीक करो।

मास्टर जी ने बच्चे को
पास बुलाया प्यार से।
समझाया बेटा मोबाइल
लेना है नहीं अब से।

बच्चा बोला मास्टर जी
मेरी भी इक बात सुनो।
सजा जो देनी है मुझे
उसके बाद ही मुझ को दो।

पापा दिन में देखते हैं
रात को मम्मी देखती हैं।
खाना हो या सोना हो
मोबाइल इनके साथ हैं।

मुझ को कह कर पढने को
खुद रीलों को देखते हैं।
मुझ को रोक कर मम्मी भी
खुद चैटिंग कर लेते हैं।

पहले बोले, ले बेटा
तू भी विडिओ देख ले।
मोबाइल एक मुझे देकर
अपना फ़ोन वे देखते थे।

आदत डाली है तुमने
अब क्यों इसको छीनते हो।
पहले दिया था मुझ को फ़ोन
अब क्यों मना तुम करते हो।

आप ही मेरे गुरु बने
बन गए आप ही मेरी राह।
फ़ोन दिया मुझे आप ने
वही बनी अब मेरी चाह।

गलती आप दोनों ने की
मैं ने तो बस नक़ल की।
आप दोनों है अब सही
गलती अब सारी मेरी।

गलती मेरी भी होगी
इस में कोई शक नहीं।
लेकिन मेरी आदत में
आपका भाग भी कम नहीं।

बच्चे भाषण से नहीं
आप को देख कर सीखते हैं।
जैसे माँ-बाप करते हैं
वैसे ही वे करते हैं।

गुरूजी बोले पापा से
ले जाओ तुम इसको साथ।
बोया पेड़ बबूल का
आम कहाँ से आयेगा?
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एक महीने पहले

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