जब भी कभी कहीं मायके की बात होती है
आंख भर जाती है, मां बहुत याद आती है।
होली की हुड़दंग हो या खेल लुकाछिपी का
गांव की वो गलियां बहुत याद आती हैं।
साॅस केचप के इस जमाने में
केरी इमली की चटनियां बहुत याद आती हैं।
फेसबुक इंस्टा के दोस्तों के दौर में भी
वही पुरानी सखियां बहुत याद आती हैं।
जब भी मिलते हैं पुराने दोस्तों से कहीं
वही पुरानी बातें पुरानी यारियां याद आती हैं।
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