जीवन केवल श्वास नहीं है, जीवन एक पुकार है,
क्षण-क्षण जलता दीपक है, फिर भी ज्योति अपार है।
पथ में शूल मिलें तो क्या, पग रुकना स्वीकार नहीं,
जिसके भीतर ज्वाला जीवित, उसकी कोई हार नहीं।
भाग्य लिखे जो माथे पर, उसको अंतिम सत्य न मान,
कर्म स्वयं तलवार बना ले, स्वयं रच अपना विधान।
काल अगर प्रतिकूल खड़ा हो, आँखों में अंगार रख,
तूफ़ानों से कह दे बढ़कर, मेरे भीतर भी धार रख।
दुःख आए तो उसे तपस्या, सुख आए तो दान समझ,
जो कुछ मिला समय के हाथों, उसको जीवन-ज्ञान समझ।
गिरना भी संघर्ष का हिस्सा, उठना ही पहचान बने,
घावों से जो सीख सके वह, जग में अमर निशान बने।
क्या पाया, यह मत गिन मानव, क्या खोया मत याद कर,
जो शेष बचा है जीवन में, उससे अपना विश्व सँवार।
राह कठिन हो, रात घनी हो, फिर भी दीप जलाए जा,
अपने हिस्से का सूरज तू, अपने हाथ बनाए जा।
जीवन रणभूमि नहीं केवल, यह निर्माण की भूमि भी है,
आँसू में भी शक्ति छिपी है, पीड़ा में अनुभूति भी है।
जो अपने भीतर जीत गया, जग से उसको क्या डरना,
मनुष्य वही जो मृत्यु सामने हो, फिर भी जीवन चुनना।
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