जिसको चाहा उसे भूल जाना पड़ा
दिल तो लगता न था पर लगाना पड़ा
हम थे मुफ़लिस बहुत सी थी मजबूरियां
इसलिए छोड़कर घर को जाना पड़ा
- बजरंगी लाल
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X