रोजगार के हेतु ही,छोड़ दिया है देश
कैसे-कैसे लोग हैं, कैसा है परिवेश
कैसा है परिवेश,देश का हमें बताएं
काम-धाम कैसा है,हमको भी समझाएं
कह "बजरंगी लाल",भाग्य हैं कहां अहार के
दर-दर भटक रहे,अधीन हो रोजगार के
लोकतंत्र बस नाम का,राजतंत्र है देश
जनता ससुरी मर रही,राजा रहे विदेश
राजा रहे विदेश किसी की एक न सुनता
तिल का ताड़ बताकर फर्जी बातें बुनता
कह बजरंगी लाल, हैं सभी अधूरे काम।
नेता जी सुनते नहीं लोकतंत्र बस नाम।।
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