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एनिवर्सरी

                
                                                         
                            सुख-दुख के साथी तुम्हीं,तुम ही मेरा प्यार।
                                                                 
                            
जीवन के आधार हो, तुमसे ही संसार।।

तुम्हें उपहार क्या मैं दूं सभी उपहार तुमसे हैं
हमारी जिंदगी में जीत औरो हार तुमसे हैं
मेरी सोना मेरी चांदी मेरी हीरा तुम्हीं ज़ाना
समझता हूं हमेशा मैं सभी त्यौहार तुमसे हैं
- बजरंगी लाल
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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