जो दिखा सच नहीं होता अक्सर
कैसे कह दूँ की सच कहा तूने ?
अपना अपना अलग नज़रिया है
वरना बस वाक़्या सुना तूने ?
प्यार करने की चीज़ है ही नहीं
इसके एहसास को छुआ तूने ?
अहमियत है तुम्हारे लहजे की
वरना जुमला अदा किया तूने ?
वो बज़ाहिर है चार सू न दिखा ?
किस नज़र से उसे देखा तूने ?
सिर्फ तस्वीर अपनी देखि है
खुद का चेहरा कभी देखा तूने ?
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