आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

वो बज़ाहिर है चार सू न दिखा ?

                
                                                         
                            जो दिखा सच नहीं होता अक्सर
                                                                 
                            
कैसे कह दूँ की सच कहा तूने ?

अपना अपना अलग नज़रिया है
वरना बस वाक़्या सुना तूने ?

प्यार करने की चीज़ है ही नहीं
इसके एहसास को छुआ तूने ?

अहमियत है तुम्हारे लहजे की
वरना जुमला अदा किया तूने ?

वो बज़ाहिर है चार सू न दिखा ?
किस नज़र से उसे देखा तूने ?

सिर्फ तस्वीर अपनी देखि है
खुद का चेहरा कभी देखा तूने ?
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर