दिल पर लगी जो चोट तो लब नहीं शिकवा
किया ए दिल-ए-नादां तूने यह क्या किया
दिल ने भरी एक आह और मुस्कुरा कर बोला
इसी चोट ने संगमरमर को ताजमहल बना दिया
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