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पूर्वोत्तर की प्राणवायु : चिकन नेक

                
                                                         
                            भारत के नक्शे पर देखो, एक पतली सी रेखा है,
                                                                 
                            
सिलीगुड़ी का वो गलियारा, जिसने सबको देखा है।

महज़ बाइस किलोमीटर चौड़ा, 'चिकन नेक' ये कहलाता,
बाकी पूरे भारतवर्ष से, सात बहनों को मिलाता।

यही देश की प्राणवायु है, यही हमारा है आधार,
इसके दम पर ही धड़कता, पूर्वोत्तर का है संसार।

समस्या इसकी चौड़ाई में, एक बहुत ही संकरा पार,
नेपाल, भूटान, बांग्लादेश से, घिरा हुआ है ये हर बार।

उत्तर में है चुम्बी घाटी, ड्रैगन की है तिरछी नज़र,
डोकलाम का वो तीखा विवाद, छोड़ गया है गहरा असर।

दुश्मन की है यही साज़िश, काट दे ये पतली सी डोर,
ताकि मुख्य भूमि से कट जाए, पूर्वोत्तर का हर एक छोर।

तस्करी और घुसपैठियों का, रहता है हर दम दबाव,
सामरिक दृष्टि से भारत का, है ये सबसे नाज़ुक घाव।

सावधानी ही है बस उत्तर, रहना होगा हमें तैयार,
सीमाओं पर कड़ी चौकसी, सेना का हो सुदृढ़ आधार।

बुनियादी ढांचे को गढ़ना, बहुत ज़रूरी है अब काम,
सड़क, रेल और हवाई पट्टी, बनें निरंतर सुबह-शाम।

पड़ोसियों से कूटनीति के, रिश्ते हमें सँवारने हैं,
बांग्लादेश और भूटान के संग, वादे हमें निभाने हैं।

वैकल्पिक रास्तों की खोजें, 'कलादान' सा हो प्रकल्प,
पूर्वोत्तर को जोड़े रखना, यही राष्ट्र का हो संकल्प।

 
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2 महीने पहले

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