आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मैदान का महासंग्राम

                
                                                         
                            गूँज उठा है फिर से नारा,
                                                                 
                            
झूम रहा है विश्व ये सारा।

हरी घास का सज गया आँगन,
फुटबॉल में अटका हर मन।

एक गेंद और ग्यारह खिलाड़ी,
दौड़ रहे हैं बनके शिकारी।

पाँव का जादू, सिर का कमाल,
नेट में जाकर फँसे जब बाल !

‘गोल’ हुआ तो गूँजा स्टेडियम,
थम जाता है पल भर को दम।

कोई रोया, कोई मुस्काया,
जीत का परचम किसने लहराया?

मेसी, रोनाल्डो या कोई नया सितारा,
हर दिल में है अरमान हमारा।

देश भले ही अलग-अलग हों,
खेल ने सबको गले लगाया।

यह सिर्फ खेल नहीं, एक जंग है,
जिसमें पूरा विश्व एक रंग है।

फुटबॉल का यह महाकुंभ निराला,
इसने हर दिल में जोश भर डाला!
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर