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उनसे पल भर नज़र...

                
                                                         
                            उनसे पल भर नज़र मिला बैठे।
                                                                 
                            
अपनी दुनिया ही हम लुटा बैठे।

दिल में तूफ़ाँ कई छुपा बैठे।
हम ही अपना सुकूँ गँवा बैठे।

बे-वफ़ाई का ज़िक्र क्या करना,
हम ही ख़ुद से नज़र चुरा बैठे।

रास्ता रोक कर खड़े थे जो,
हम उन्हें रास्ता दिखा बैठे।

दुश्मनों से गिला करें क्या हम,
अपने अपनों को आज़मा बैठे।

ज़ख़्म सीने के जो छुपाए थे,
ख़ुद ही महफ़िल में सब सुना बैठे।

रोशनी की तलाश में निकले,
ख़ुद अँधेरों को घर बुला बैठे।

आशियाँ अपना ढूँढने निकले,
आँधियों को गले लगा बैठे।

हसरतें दिल में जो छुपाई थीं,
आज आँखों से सब बहा बैठे।

- अज़हर साबरी
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2 महीने पहले

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