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सर कभी झुकता नहीं...

                
                                                         
                            मुश्किलों के सामने जो सर कभी झुकता नहीं।
                                                                 
                            
रास्तों की धूल से वो कारवाँ रुकता नहीं।

जो समंदर से लड़ा है, जीत उसकी तय ही है,
जो किनारों पर रुका, उसको तो कुछ मिलता नहीं।

आँधियों के सामने जो शमा बनकर डट गया,
वक़्त की तारीख़ में वो नाम यूँ मिटता नहीं।

मुस्कुरा कर सह गया जो हर सितम तक़दीर का,
जीत की दहलीज़ पर वो शख़्स फिर रोता नहीं।

तख़्त वालों से कभी अपने क़दम मत तौलना,
मेहनतों का हक़ किसी दरबार में बिकता नहीं।

जो पसीनों से मुक़द्दर की इबारत लिख गया,
कामयाबी का सितारा उससे फिर छुपता नहीं।

'अज़हर' उसूलों पर चला हूँ, सिर उठा कर आज तक,
वक़्त बदला, पर मेरा ये सर कभी झुकता नहीं।

- अज़हर साबरी
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3 महीने पहले

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