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हक़ीक़तों से किनारा...

                
                                                         
                            हक़ीक़तों से किनारा नहीं किया जाता।
                                                                 
                            
हर एक सच को तमाशा नहीं किया जाता।

अगर है बात तो किरदार भी गवाही दे,
फ़क़त ज़ुबाँ पे भरोसा नहीं किया जाता।

दिलों को जीतने को सादगी भी लाज़िम है,
तकल्लुफ़ों का सहारा नहीं किया जाता।

हज़ार चेहरे मिलें, दिल मगर नहीं मिलते,
हर एक शख़्स से रिश्ता नहीं किया जाता।

जो साथ छोड़ गया, उसको भूलना बेहतर,
हर एक ज़ख़्म को ताज़ा नहीं किया जाता।

जो ख़ुद जले वही औरों को रौशनी देगा,
यूँ हर किसी को सितारा नहीं किया जाता।

ख़िज़ाँ से डर के कोई बाग़ छोड़ता कब है,
उम्मीद को यूँ रुस्वा नहीं किया जाता।

भँवर हो, आग हो, दरिया हो पार जाना है,
किनारे बैठ गुज़ारा नहीं किया जाता।

- अज़हर साबरी
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3 महीने पहले

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