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छोटा सा काम

                
                                                         
                            कहने को छोटा सा काम है।
                                                                 
                            
पर् हो जाने पर् बडा मुकाम।।
मन्नतें उनकी आपके साथ है।
जिनसे आपकी रोजाना बात है।।

बीत जाएंंगे कष्ट के ये पल।
बस थोड़े समय की बात है।।
धैर्ये संयम और साहस् की हो रही अब परीक्षा।
ना जाने अब क्या है समय की इच्छा।।
कहने को छोटा सा काम है।
पर हो जाने पर् बडा मुकाम है।।

(कुमार अवनीश)

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले

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