सब तरफ
मिल रहे
झाँसे हैं।
राजनीति और
शकुनि के
पाँसे हैं।।
नैतिकता खून से
तर बतर है।
देश की हालत
बद से बदतर है।।
-अविनाश ब्यौहार
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