देश की दुर्दशा से
हम बहुत थे
परेशान ।
जरा धीरे बोलिए
दीवार के भी
होते हैं कान ।।
हम बहुत
मायूस रहे हैं।
राजनैतिक दल
देश का खून
चूस रहे हैं।।
-अविनाश ब्यौहार
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