दफ्तर सारे बूचड़खाने।
हर कोई ऐसा ही माने।।
अम्मा आंगन में चिड़ियों को,
चुगा रही अनाज के दाने।
यदि कोई अपराध करे तो,
सजा-वजा के हैं पैमाने।
फिल्मों में मैंने ये देखा,
फूहड़- फूहड़- फूहड़ गाने।
दोस्त बना औ काट रहा था,
देरी से उसको पहचाने।
रुपयों का अवमूल्यन होता,
एक समय चलते थे आने।
-अविनाश ब्यौहार
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