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जिंदगी में सावधानी रख।

                
                                                         
                            जिंदगी में सावधानी रख।
                                                                 
                            
ना किसी पर बदगुमानी रख।।

नौकरी से कुछ नहीं होता -
रख अगर अच्छी किसानी रख।

गाँव-खेड़ा तो बहुत देखा -
और अब तूँ राजधानी रख।

ये अदालत तो ठगी करती-
शान-शौकत से प्रधानी रख।

छूट जाए साथ मानो तब-
ले अँगूठी की निशानी रख।

गीत-गजलें हैं बहुत पढ़ लीं -
आज से सच्ची कहानी रख।

वक्त कितना बेरहम निकला -
हो सके तो मेहमानी रख।
-अविनाश ब्यौहार
 
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3 महीने पहले

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