जिंदगी में सावधानी रख।
ना किसी पर बदगुमानी रख।।
नौकरी से कुछ नहीं होता -
रख अगर अच्छी किसानी रख।
गाँव-खेड़ा तो बहुत देखा -
और अब तूँ राजधानी रख।
ये अदालत तो ठगी करती-
शान-शौकत से प्रधानी रख।
छूट जाए साथ मानो तब-
ले अँगूठी की निशानी रख।
गीत-गजलें हैं बहुत पढ़ लीं -
आज से सच्ची कहानी रख।
वक्त कितना बेरहम निकला -
हो सके तो मेहमानी रख।
-अविनाश ब्यौहार
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