आदमी वो गायबाना लग रहा।
वक्त कुछ तो आशिकाना लग रहा।।
देखता हूं शख्स की मजबूरियां-
बेरहम सा ये जमाना लग रहा।
नौकरी में है प्रलोभन देखिए-
आज खुद को है बचाना लग रहा।
आग फैली है वहां पर कुछ करो-
लीजिए दमकल बुलाना लग रहा।
वो शहर है गांव से कुछ दूर ही-
उस शहर का दिन सुहाना लग रहा।
झोपड़ी के भाग्य हैं कब खुल रहे-
मुफलिसी का आबदाना लग रहा।
-अविनाश ब्यौहार
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