मेरी बुराइयों से आकर्षित है संसार,
मेरी देह, मेरी आत्मा,
मेरा मन, मेरी सुंदरता
और मेरे होने में भी
जो भी अवगुण हैं
संसार पहचानता है
संसार मेरी सब कमियों को जानता है,
दुनिया ढूँढ़ लेती है मेरे अवगुण
और सूची बनाकर
अपनी जेबों में भरे रखती है
और जब-तब मुझे दिखाती है
मुझे दिखाती है, मुझे दुखाती है।
पर कोई है, मुझे जिससे प्रेम है
जिसे मुझसे प्रेम है
उसको याद नहीं रहती मेरी कमियाँ
मेरे दोष, मेरे खोट
उसकी आँखों से अदृश्य हैं
मेरे अवगुणों के
जंगल को वो काट देती है
प्रेम की छलनी से
मुझे छान लेती है
मेरे नगण्य गुण से भी
खुद को बाँध लेती है
मुझ पर प्रेम छिड़कती है
मैं महकता हूँ तो
उसकी पसन्द बन जाती है।
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