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छोटी दुनिया

                
                                                         
                            छोटी दुनिया उलझी हुई नहीं होती
                                                                 
                            
छोटी दुनिया में बड़प्पन नहीं होता
न विस्तार की लालसा
न आसमान पाने की व्याकुलता
और न किसी और दुनिया से होड़,
अपने आप से खुश रहने की सार्थकता
खुशी लेने और खुशी देने की सरलता,

एक छोटी दुनिया किसी
दूसरी छोटी दुनिया की तरफ खिंचती है
इन छोटी दुनियाओं का विज्ञान अलग है
ये कोशिका विभाजन से उलट प्रकिया है
इसमें एक छोटी दुनिया किसी
दूसरी छोटी दुनिया से जुड़ती है
और फिर अटूट, सम्यक और निरपेक्ष एक
प्रेम और संवेदनाओं की दुनिया बनती है,
जिस अनुभव और अधिकार से बड़ी दुनिया
सबकुछ पा लेने के बाद भी खाली रहती है
-अवतार सिंह अक्षरजीवी
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2 महीने पहले

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