ज़िंदगी के रोशन रंगमंच पर,
इलाही लेखक ने नाटक एक रचाया,
ढेरों अदाकारों को जमा कर,
हाथों में सबके बेबस किरदार थमाया।
नायक की भूमिका निभाने वाले,
अदाकारों ने कई खूबियाँ दिखलाई,
पर आँखों में आँसू, और पैरों में छाले,
सच्चाई के अंगारों पे चलने की,
नायकों ने यह कैसी कीमत चुकाई।
शैतान का किरदार दर्शाने वाले,
अहंकार और छलावा की मिसाल फ़रमाई,
पर आँखों में तेज़, और
पैरों पर फूलों की भेंट
रंगमंच की रोशनी चमका कर,
लेखक ने शैतान की पूजा करवाई।
लेखक ने पन्नों पर जो ज़ुल्म लिखा,
अनोखे रंगमंच पर सिर्फ शैतान बिका,
बड़ी ज़ालिम स्क्रिप्ट इलाही लेखक की,
तमाशबीनों ने दर्द तो देखा, पर
आवाज़ सिर्फ आयी सन्नाटों के चिखने की।
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