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शोर का अंत

                
                                                         
                            शान्ति मेरा ताज,
                                                                 
                            
सन्नाटा मेरा राज,
ना कोई हथियार,
ना कोई फ़ौज मेरे साथ,
अकेले जंग लड़ी मैंने शोर से आज।

समय मेरी ढाल,
सब्र मेरी चाल,
सुकून मेरी महबूबा,
संतोष मेरी मिसाल,
सेनापति साज़िश का किया है मैंने इंतक़ाल।

शोर बहते आया मेरी तरफ़,
मैं शांत रहा खड़ा,
वो नदी भी चुप हो गई,
जब समंदर देखा बड़ा,
मेरी जीत का सन्नाटा गूंजेगा,
जो मैं शोर से लड़ा।

जीत की चुप्पी लेकर,
मैं क़रार के क़दम चला,
डूबते सूरज की शांत शाम में,
मैं अपने मौन मुल्क से मिला,
हुआ शोर का जो अंत,
तो भीतर एक नया सवेरा खिला।
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3 महीने पहले

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