बहकर अनमोल आँसू आँखों से, गए स्याहीदानी,
मसनूई रंग हुआ गहरा, जब मिला तरल इंसानी,
दुख-रूपी कलम से छोड़ी गंभीर निशानी,
कला-रूपी कागज़ पर लिखी दर्द की कहानी,
जज़्बाती मिसरों का राज़, है अश्कों की क़ुर्बानी।
हर ज़ख़्म बनता आगही की एक नयी आँख,
फ़िक्री नज़रों से मुशाहिद होता हर इल्हाम,
ढूँढ लेता ख़ाली अँधेरे से भी अलफ़ाज़,
फिर स्याही सिलती शब्दों को शायरी में,
शानदार शेरों से झलकता ज़ख़्मों का अन्दाज़।
अब आँखों से बहती स्याही, है रूह का रुझान,
और पीड़ित पन्नों पर है अश्कों के निशान,
हर नम दाग़ है मलाली माजरों का बयान,
हर शिकायत के स्वर, हैं ग़ज़लों के गान,
इन गीतों की गहराई से है राही रूह की पहचान।
सूखी स्याही, समय के साथ, हुई सुनहरी,
पीड़ित पन्ने, बने परिश्रम की परम प्रतिमा,
आँखों के आँसू, अब हैं अल्फ़ाज़ी अलमास,
बाँधा हर अलफ़ाज़ को गहराई के गोंद से,
कागज़ से पहना है दर्द ने शायराना लिबास।
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