कलाकार ने करी कररेखा,
चली चेतना में एक छोर से,
अनिश्चय होकर हुई असफल,
अधूरी अनुभूति की अटकी डगर,
कला की कहानी की कच्ची खबर....
विवाद-युद्ध में विचार का वीर,
विद्वत्ता-बल की वो विकट ज़ंजीर,
हुज्जत का हल्ला हारा एक हास्य से,
प्रतिद्वंद्वी की न परिपूर्ण परिचर्चा,
जानकार की जलाई जिज्ञासु-अर्चा....
अर्धचंद्र की अधूरी अतुल्यता,
अधखिली कली का अवरोध अद्वितीय,
कुदरत के भी कई कुंठित काव्य,
सृष्टि की स्याही का सुंदर संकोच,
प्रकृति की पूर्णता पर पहला प्रहार....
अंतिम अवस्था का वो अधूरा अवसान,
अतृप्त अभिलाषा का वो अनुपम अनुराग,
भंग मूर्छना का भी वो मनभावन मोल,
अपूर्णता ही है इस अस्तित्व का आधार,
अधूरी रेखा ही है अनंत का शृंगार....
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