आज कुछ हो जाए,
कोई बात अधूरी है, जो पूरी हो जाए।
जो ख़ामोशी से दिल में रहती है,
वो नज़रों से बयाँ हो जाए।
आज कुछ हो जाए,
कोई दुआ क़ुबूल हो जाए।
मैं उसे देखूँ और वक़्त ठहर जाए,
वो मुस्कुरा दे और दिन मुकम्मल हो जाए।
आज कुछ हो जाए,
इश्क़ का ज़िक्र न सही,
बस उसकी एक झलक मिल जाए,
और ये दिल फिर से ज़िंदा हो जाए।
आज कुछ तो ख़ास हो जाए इस शाम में,
या वो मिल जाए,
या उसका ज़िक्र हो जाए।
और अगर कुछ भी न हो सके…
तो बस इतना हो जाए—
मैं उसे याद करूँ,
और ये शाम…
उसके नाम हो जाए।
आज कुछ हो जाए।
— रजत शर्मा
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