क्या पता कल धूप निकल आए,
और ये प्यारी बरसात न रहे…
हो सकता है कल मेरे आज जैसे हालात न रहें,
आज थोड़ा मजबूर हूँ, तो तू मुँह फेर ले मुझसे…
क्या पता कल तेरी मुझसे नज़रें मिलाने की भी
औकात न रहे।
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