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सावन की फुहार,खोले दशम द्वार

                
                                                         
                            छाई हरियाली चारों ओर, करे मंत्रमुग्ध
                                                                 
                            
राग मल्हार सुकून का प्रवाह करे अनिरुद्ध।
काले मेघों में छिपी नमी की बहार,
धरा की गर्मी को पर्दे में छुपाए सावन की फुहार।

रिमझिम गिरे अंगना में, प्रकृति ना भेद करे,
खेत खलियानों, नदियों और शहरों में एक समान गिरे।
झींसी कभी, तो कभी मूसलाधार जल प्रवाह,
मेघों की गड़गड़ाहट और टीन की छत पर संगीत अथाह।

जल और वायु का मेल प्रस्तुत करे मनोरम दृश्य,
प्रकृति ज्यों उजागर करे एक दिव्य रहस्य।
मूल तत्वों में ब्रह्मांड की सर्वोच्च शक्ति,
लयबध्द ध्वनि उत्पन्न करें असीम भक्ति।

बारिश की रिमझिम जब तन को छूती है,
नम मन वैराग से भर जाता है,
उसकी महर की वर्षा मानो आत्मा भिगोती होती है,
और प्रत्यक्ष नूर बिखर जाता है।
भावना की बारिश और शब्दों से भीगी आत्मा,
गुणों के गहनों से सुसज्जित, पा ही लेती परमात्मा।
-अश्विंदर बावा
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2 महीने पहले

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