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मै पत्थर की लकीर हूँ

                
                                                         
                            इरादा पूछ , फिर इरादे की भांति तू भी खड़ा रहे ।
                                                                 
                            
मंजिल मिलेगी , हिमालय की भांति तू भी अड़ा रहे ।।

बता हौसले जांबाजो के , कि तुफानो से नहीं डरते।
डर के आगे जीत है , इसी बात पर तू भी डटा रहे।।

शाहिल ने तूफानों से नहीं पूछा कि तूफान कब आयेगे ?
मांझी ने किश्तिया दौड़ाई है ,भले साल भर जाड़ा रहे ॥

मैं इश्तिहार नहीं हूँ , जो एक बारिश मे घूल जाऊँगा ।
पत्थर पर खिंची लकीर हूँ , हाथ में छैनी हथोड़ा पकड़ा रहे ॥

नेकी कर दरिया मे डालने वाले ,रहते सदा खुशहाल I
बुजुर्गों की इसी बात पर , इब्ने - मीर तू भी जुड़ा रहा ॥
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एक महीने पहले

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